गज़ल/गीतिका · Reading time: 2 minutes

कन्नैया-कन्नैया तुम्हें आना पड़ेगा!वचन गीता वाला निभाना पड़ेगा

आओ मोहन प्यारे,आओ!संकट में है दीन दुखीयारे,
विनती कर-कर तुम्हें पुकारे,तुमने कितने ही हैं संकट टारे!
जब-जब भीड़ पडी भक्तों पर,आकर तुमही सकंट हारे!
आओ मोहन प्यारे, आओ! आकर संकट से तारो!
लूट रहीं लाज बहन-बेटियों की,तुम ही तो लाज बचाए!
चीरहरण से जब द्रौपदी अकुलाई,राज-सभा में दी दुहाई,
कुल वधू हूँ मैं पितामहः, भीष्म नजर चुराए!
कृपा चार्य से करती आग्रह, आप ही लाज बचाएं!
कृपा चार्य करके इशारा,कृष्ण का ध्यान कराऐं,
समझ गई अब पांचाली, द्वारिकाधीश को पुकारे!
संकट में है. सखी तुम्हारी, कृपा करो कृष्ण मुरारी !
चीर खिंचता है दुशासन, राखो लाज हमारी!
बढती जाए चीर साडी की, तुम ,तारण हार कहलाए!
आओ मोहन प्यारे आओ,आकर संकट से तारो!
उत्तरा पर जब भीड पडी थी,तब भी हो तुम आए,
चीख रही थी, पांडव कुल वधू,संकट में है कुल का सूरज!
आकर उसे बचाओ !,हे गिरधर,हे गिरधारी!, तुम आकर प्राण बचाऐ।
ऊँच -नीच का भेद मिटाया, राज भोज को ठुकरा के,
विदुरानी के हाथ से खाया, विदुर का किया था अपमान दुर्योधन ने
आपने मान विदुर का बढाया! जात पात का भेद मिटाने को,
आकर राह बताओ ।आओ मोहन प्यारे आओ, आकर संकट हारो!
संकट में है आज गौ मय्या,दर-दर भटक रही है गय्या,
सबने उससे नाता तोडा,घर आँगन से बाहर उसे छोडा!
जहाँ-जहाँ भी वह है जाती ,खाकर मार वह अकुलाती !
दाने दाने को वह तरस रही , जो अमृत है बरसाती।
तुमने भी तो उसे मां कहा है, इसलिए गोपाल कहलाऐ!
तुम्हें पुकारती है गौ मैय्या,, आकर कष्ट भगाओ!
गौ मैय्या केे हे गोविंदा, आकर हमें दर्श कराओ।
हे मुरली मनोहर,,हे बंशीधर ! हे गोकूलवाशी,हे बृजमोहन!
हे गिरधारी ,हे मोर मुकुट धारी!हे राधा के मन मोहन!
संकट में है आज यमुना भी,जार -जार वह भी है रोती !
काली नाग से तुम बचाऐ थे ,कर रहा था जो जल विषैला ,
आज के मानव कर रहे मैला,पीने लायक नही रही मै ,करके मुझे जहरीला !उद्धार करो मेरा तुम प्रीतम,आकर मुक्ती दिलाओ!
हे मन मोहना,हे परमेश्वर,मुझको कंठ लगाओ।
यशोदा नंदन, हे मधु सूदन! हे मुरलीधर तुम आओ!
आओ मोहन प्यारे आओ, आकर देख तो जाओ!
युद्ध भूमि में ग्यान गीता का पार्थ को था कराया
कर्म किए जा फल की ईच्छा ना कर यह उपदेश बताया!
बिना फल के आज कर्म को नहीं तैयार है कोई?
फिर जरूरत है पड रही आने की, अब आ भी जाओ!
आओ मोहन प्यारे आओ, आकर अपना फर्ज निभाओ।।
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कन्नैया- कन्नैया तुम्हें आना पड़ेगा,बचन गीता वाला निभाना पड़ेगा।

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