आओ मिलकर गणतंत्र उत्सव मनाये

किसी ने कपास बोया
किसी ने पानी पिलाया
किसी ने निराई गुडाई की
किसी ने कपास का सूत काता
किसी ने उलझे को सुलझाया
किसी ने हाथों से बुना
तब है आवरण बन पाया
मिलकर विद्वानों ने बनाया
दो साल, ग्यारह महिने
अट़ठारह दिन इसमें लगाया
इस तरह ये लिपिबद्ध हो पाया
पवित्र पुस्तिकों में इसे बनाया
गीता, कुरान, गुरुमुखी व बाइबिल
सबने समान सम्मान है पाया
सबको अपना घर सा देश लगे
ऐसा सबको अधिकार है दिलाया
सभी को एक सूत्र में बांध
पूरे देश का सुरक्षा कवच बनाया
ऐसा प्यारा ये संविधान बनाया
चार स्तम्भों पर इसे टिकाया
देशवासियों के कर्तव्य का
पग पग पर है बोध कराया
आओ हमारे कर्तव्य और अधिकार में
तारतम्य बिठा हर्षायें
आओ मिलकर गणतंत्र उत्सव मनाये
आओ मिलकर गणतंत्र उत्सव मनाये

लक्ष्मण सिंह

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