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सद् गणतंत्र सुदिवस मनाएं

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

कविता

May 9, 2017

सद् गणतंत्र सुदिवस मनाएं |
जीवन में अनुपम प्रकाश के रंग भरे, उल्लास सजाएं

राष्ट्र हमारा कल गुलाम था
आज स्वयं हम ही गुलाम है
अवनति- हिंसामय रोगों से,
एंठू है, हम सिर्फ चाम है
सोई आत्मा, आँसू गम के,
निकल रहे, कुछ तो शर्माएं
सद् गणतंत्र सुदिवस मनाएं

कहीं लूट,इज्जत औ धन की
बन बैठे हम हिंसक -सनकी
जीवित हैं, गह अहंकार को,
चिंता नाहीं इनको जन की
स्वयं सुधरिए ,जग सुधरेगा,
नारे को कुछ तो अपनाएं
सद् गणतंत्र सुदिवस मनाएं

जय-जय, केवल है भाषा में
मन ,दूरी की परिभाषा में
अंतःकरण मिले ना भैया
बुद्धि, प्रेम की अभिलाषा में,
बैठी ,यह अज्ञान तिमिर है
दिल-सुबोल को कर्म बनाएंं
सद् गणतंत्र सुदिवस मनाएं

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

-मेरी इस रचना को मेरे Facebook पेज
” बृजेश कुमार नायक की रचनाएं” मैं पढ़ा जा सकता है|

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09-05-2017

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Author
बृजेश कुमार नायक
कोंच,जिला-जालौन (उ प्र) के बृजेश कुमार नायक साहित्य की लगभग सभी विधाओं के रचनाकार हैं |08मई 1961को ग्राम-कैथेरी(जालौन,उ प्र)में जन्में रचनाकार बृजेश कुमार नायक की दो कृतियाँ "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" प्रकाशित हो चुकी है |पूर्व राज्य... Read more
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