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सद् गणतंत्र सुदिवस मनाएं

सद् गणतंत्र सुदिवस मनाएं |
जीवन में अनुपम प्रकाश के रंग भरे, उल्लास सजाएं

राष्ट्र हमारा कल गुलाम था
आज स्वयं हम ही गुलाम है
अवनति- हिंसामय रोगों से,
एंठू है, हम सिर्फ चाम है
सोई आत्मा, आँसू गम के,
निकल रहे, कुछ तो शर्माएं
सद् गणतंत्र सुदिवस मनाएं

कहीं लूट,इज्जत औ धन की
बन बैठे हम हिंसक -सनकी
जीवित हैं, गह अहंकार को,
चिंता नाहीं इनको जन की
स्वयं सुधरिए ,जग सुधरेगा,
नारे को कुछ तो अपनाएं
सद् गणतंत्र सुदिवस मनाएं

जय-जय, केवल है भाषा में
मन ,दूरी की परिभाषा में
अंतःकरण मिले ना भैया
बुद्धि, प्रेम की अभिलाषा में,
बैठी ,यह अज्ञान तिमिर है
दिल-सुबोल को कर्म बनाएंं
सद् गणतंत्र सुदिवस मनाएं

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

-मेरी इस रचना को मेरे Facebook पेज
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पं बृजेश कुमार नायक

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09-05-2017

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Pt Brajesh Kumar Nayak
Pt Brajesh Kumar Nayak
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