कविता · Reading time: 1 minute

आए क्यों ना माधव तुम १

बात पूछनी है माधव , आज्ञा हो तो पूछूं क्या,
संकोच कैसा कृष्णे तुम्हें,
दूंगा तेरे हर सवालों के जवाब में जी भर के,
हों रहा था मेरा जब वस्त्र हरण,
तब आए क्यों ना तुम मुझे बचाने बिना बुलाए,
क्या कर रहे थे प्रतिक्षा मेरे पुकार कि,
क्या आते नहीं आप बिना बुलाए??
जब दांव पे पांडव ने लगाया सब कुछ,
तब रोका आप ने क्यों ना उन्हें??
अपमान होने क्यों दिया मेरा भरी सभा में??
क्यों चुप चाप सुनते रहे,
लगाएं जो लांछन सभी ने??
पुकारती नहीं केशव तुम्हें मैं तो,
क्या मेरी रक्षा करते ना तुम?
ना ऐसा होता ना कभी कृष्णे,
ना बुलाती फिर भी मैं हाज़िर हो जाता,
तेरे सम्मान के रक्षा के लिए यज्ञसेनी,
बदल देता मैं गति समय की,
फिर क्यों की प्रतीक्षा मेरी पुकार कि??
आए क्यों ना तुम जब ले जा रहा था,
दुशासन मुझे केशो से टान के,
मेरे ना आने का कोई तो कारण होगा,
पर, अपने प्रेम का सौगंध खा कहता हूं,
तेरी सतीत्व कभी नष्ट होने ना देता,

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