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आए कोई पास मेरे, अपना बनाने आए !

Anurag Dixit

Anurag Dixit

कविता

September 14, 2017

आए कोई पास मेरे, अपना बनाने आए !
खोलकर अपनी उनीदी पलकें,
अपने ख्वाबों को मेरे दिल में सजाने आए
राह कट जाएगी यूँ ही चलके
दो कदम जो वो मेरे साथ बढ़ाने आए
आए कोई पास मेरे, अपना बनाने आए !
तुम भी एक रोज़ चलो कोई बहाना कर के ,
तुम से मिलने को हमें लाख बहाने आए
मेरी हसरत के खिले फूल ये मुरझा कर के,
कैसे आँखों में ये दो बूँद सुहाने आए
आए कोई पास मेरे, अपना बनाने आए !

Author
Anurag Dixit
मेरा जन्म फर्रुखाबाद के कमालगंज ब्लॉक के ग्राम कंझाना में एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ,मैंने वनस्पति विज्ञानं में एमएससी,ऍम.ए. समाजशाह्स्त्र एवं एडवरटाइजिंग पब्लिक रिलेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया,व जन स्वास्थ्य में,परास्नातक डिप्लोमा किया, विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशन एवं... Read more
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