मुक्तक · Reading time: 1 minute

आईना देखकर वो कुछ इस तरह मुस्कराने लगे

1.

आईना देखकर वो
कुछ इस तरह मुस्कराने लगे
शायद पहली बार खुद से
रूबरू हुए थे वो

2.

जाहिर कर दिया मैंने
उस खुदा पर भरोसा
अब उसकी बारी है
वो अपना करम करे

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मैं अनिल कुमार गुप्ता , शिक्षक के पद पर कार्यरत हूँ मुझे कवितायें लिखने , शायरी , गीत , ग़ज़ल , कहानियां और लेख लिखने का शौक है । मैंने…
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