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** आईना जब झूठ बोलता है **

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

कविता

February 21, 2017

*आईना जब झूठ बोलता है
मुस्कुराता हुआ चेहरा
दिल मजबूर बोलता है
तस्वीर दिखती जो आईने में
कुछ और हाल-ए-दिल कुछ और
कहते हैं
आईना कभी झूठ नहीं बोलता
आजकल पारदर्शिता दिखाने को है
महज कहने को है पारदर्शी मगर
दिल के दरवाज़े पर गहन अंधकार है तम की डोर को थामे दो दिल
दो छोर से पकड़े हैं महज दिल को कुंठित दिल अपारदर्शी सा है
सघन तम में दिल के जज़्बात
कौन सुन्ना चाहता है
आईना आजकल
सच्च की तस्वीर कब दिखा पाता है जब आईना देखनेवाले दिल
आईने को ख़ुद मैला किये देते हैं
कभी झूठ आईना दिखलाता था
आज आईना
ख़ुद को ना सम्भाल पाया है
शायद कल
यह उक्ति भी विश्वास योग्य ना रहे
कि आईना कभी झूठ नहीं बोलता आईना जब झूठ बोलता है
आईना जब झूठ बोलता है ।।

?मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more
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