आइना

किसलिये जाता वहॉ लेकर मै अपना आइना
शह्रे नाबीना को आखिर क्या दिखाता आइना

मै भी रोया देखकर बेचेहरगी की भीड़ मे
अपनी किस्मत पर बहुत ही रो रहा था आइना

किरचियों को चुनते चुनते हाथ ज़ख्मी हो गये
क्या बताऊं किस तरह टूटा है दिल का आइना

ऐसी सूरत मे यकीनन टूट जाना है मुझे
पत्थरो के दरमियॉ हूं मै ही तन्हा आइना

एक भी चेहरा कभी मुहताजे आईना न हो
लोग बन जायें अगर इक दूसरे का आइना

टूट जायेगा हसीं हर ख्वाब आज़म उस घड़ी
वक़्त दिखलायेगा जिस दिन तुझको अपना आइना

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