Mar 30, 2020 · कविता

मां के बाद रब

क्यूं पुजूं उस रब को जब …………… मन में तेरा वास‌ है
तू ही ममता का शिवाला ………… तुझमें रब का वास है
तू ही बस पहचान है मेरी …… …..तू ही है मेरी आस मां
दुध नस- नस में बहे …………… तेरी ही हर इक सांस है

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