आंगन की किलकारी बेटी

आंगन की किलकारी बेटी,
हम सब की दुलारी बेटी ।
महक रही कोने कोने तक
घर की सुंदर फुलवारी बेटी ।
माँ की राजकुमारी बेटी
वत्सलता से पाली बेटी ।
हर खुशियों से भरे आंगन
खुशियों की रखवारी बेटी ।
रूनझुन पायल बज उठते हैं ।
रूठे भी सुन खिल उठते हैं ।
जग जाते है भाग्य सभी के।
चिंता सारी मिट जाते हैं ।
सुंदर सुघर नियारी बेटी
सबकी रही दुलारी बेटी ।
क्या समझे बेटी की खुशियाँ
जहाँ न होती प्यारी बेटी ।

विन्ध्य प्रकाश मिश्र विप्र

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