आंखे

दो आंखों की जेल में उसकी हम गिरफ्तार रहे हैं।
एक जमाने से इस दिल में वो सरकार रहे हैं।।

पूछ रहे हो मुझसे तुम क्या तुमने प्यार किया है।
एक अनार के पीछे बरसों हम बीमार रहे हैं।।

शक्ल नहीं देखी बरसों से कभी किसी आईने में।
एक जमाना था जब हम भी पानीदार रहे हैं।।

हम इकलौते चल ना सकेंगे सारा जहां बदलने को।।
ऊपर से ये बीवी बच्चे और घर बार रहे हैं।।

होश संभाला जबसे बेशरम लगे हैं दुनियादारी में।
जीवन के एक-एक पल अपने तो मंझधार रहे हैं।।

9424750038

Like Comment 0
Views 38

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share