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आंखें

Raj Vig

Raj Vig

कविता

March 5, 2017

मोटी मोटी बड़ी बड़ी वो खूबसूरत आंखें
सुन्दर चेहरे पे लगती वो प्यारी आंखें
छलकती हुई वो आसमानी आंखें
झुकती पलको मे अदा लगती कज़रारी आंखे
उठती पलको मे गज़ब लगती वो नशीली आंखें
सुहाने ख्वाब दिखाती वो रूहानी आंखें
खुदा की इनायत वो हसीन सी आंखें
सदा मुस्कराती रहती वो मस्तानी आंखें
रोतों को हंसा देती वो जादू सी आंखें
आशा और विश्वास का प्रतिबिंब नूरानी आंखें
सभी को अच्छी लगती सीधी वो सच्ची आंखें
लाखो मे किसी एक की है वो संस्कारी आंखें

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राज विग

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Author
Raj Vig

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