आंखें मुंदे

आंखें मुंदे
नदी किनारे
नाव चले
पतवार हिले
हवाओं की सनसनाहट
पेड़ो की हलचल
खामोशी से
हौले-हौले
गीत सुनाये
प्रीत बताये
डालों की पत्तियां
पलकों को
छुके जगाये
शरीर जगे
सब बेजान मिले
आंखें मुंदे
नदी किनारे ।
~रश्मि

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