.
Skip to content

आँसू दो चार लिखने हैं।

अंकित शर्मा 'इषुप्रिय'

अंकित शर्मा 'इषुप्रिय'

गज़ल/गीतिका

November 2, 2016

*गीतिका*

अभी भारत की’ छाती पर कई उद्गार लिखने हैं।
हृदय की टीस के आँसू हमें दो चार लिखने हैं।

कभी मतभेद का ये युध्द मानव का नहीं थमता।
इसी के बीच सामाजस्य के उपहार लिखने हैं।

खडी दीवार नफरत की मगर दो प्रेम के अक्षर।
कभी इस पार लिखने हैं कभी उर पार लिखने हैं।

हुई है खंडहर एकत्व की प्राचीर मानव की।
कलम ले स्वप्न सुषमा के हमें साकार लिखने हैं।

कभी भी मौन रहकर हक भला कब कब मिला हमको।
हमें अब क्रांति के हाथों स्वयं अधिकार लिखने हैं।
अंकित शर्मा ‘इषुप्रिय’
रामपुर कलाँ, सबलगढ(म.प्र.)

Author
अंकित शर्मा 'इषुप्रिय'
कार्य- अध्ययन (स्नातकोत्तर) पता- रामपुर कलाँ,सबलगढ, जिला- मुरैना(म.प्र.)/ पिनकोड-476229 मो-08827040078
Recommended Posts
*आँसू*
जब भी आँख से बहते आँसू । दिल की व्यथा कहते आँसू ।। कभी दर्द में बहते आँसू । तो कभी ख़ुशी में बहते आँसू... Read more
*उड़ान मन की*
*उड़ान मन की* (गीतिका) ~ ऊंची उड़ान मन की लेकर आगे बढ़ना। गिरना उठना सौ बार मगर आगे बढ़ना। नयनों में हो स्वप्न सुनहरे कल... Read more
दिल
??दिल.??. कभी दिल मुस्कुराता है. कभी आँसू बहाता है. कभी दिल टूट जाता है. कभी सपने सजाता है. कभी गुमसुम रहे ये दिल. कभी कुछ... Read more
*****मन बावरा ***
मन बावरा मन चंचल मन बावरा पंछी दूर दूर तक सैर कराए। पल में यहां तो पल में वहां पंख लगा कर उड़ता जाए। कभी... Read more