मुक्तक · Reading time: 1 minute

आँखों में आञ्जलों

गर आँखों में आञ्जलों तुम बना ख्वाब
गर ख्वाब में भी काँटों-गुलाब हो ख़्वाब
खोल दे स्वप्न-राज क्या पाओगे सम्भाल
खुली क़िताब रख दें रखें जो राज ख्वाब।।
💐 मधुप बैरागी

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