आँखे

आँखों का पथराना
देखा है या देखी है
आँखों की चंचलता
सूनापन गहरा था या
सम्मोहन का जादू
नयनो की भाषा
मौन होने पर भी
हृदय को करती मुखर
बोल देती
अनकहा भी बहुत कुछ
मैं मेरे नयन पलको के नीचे
तुम्हे निहारते घन्टों
और तुम समझते
आँखे बंद हो भूल गई तुम्हे
मगर …
क्या है इतना आसान
आँखों मे समाई सूरत को
आँखों से ओझल कर देना
मेरी आँखो के सागर मे
तुम मन पर प्रतिबिंबित होता चित्र हो
जिसे संजोए हूँ मै
पलको की परत के नीचे
सदियो से

शिखा श्याम राणा
पंचकूला हरियाणा ।

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हिंदी कविता कहानियाँ लिखने का जनून की हद तक शौक तो है मगर अभी छात्रा...
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