Dec 1, 2017 · कविता
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अज़ब सा प्यार

अजीब सा रिश्ता था वो
जो खत्म हो गया
न जाने कैसे शुरू हुवा
न जाने कब खत्म
ग़ज़ब का लगाव था
अज़ब सी कहानी
शायद उसे पकड़ना न था
हाथ तो आगे बढ़ाया था मैंने
थोड़ा अलग था वो प्यार
एक बार दिखी तो शुरू हुवा
दूसरी बार दिखती उस से पहले खत्म
कोई जल्दी भी तो न थी
परंतु साहस भी कहा था
थोड़ी पागल थी वो लड़की
या शायद भोली
विश्वास कर लिया था किसी
अनकही बातों पर
या शायद नज़र आ गई थी मेरी कमी
शायद भूल जाउ ये सब
पर उसकी प्यारी सी धमकी मुझे बर्बाद हो जाने वाली बदुआ
याद है मुझे
वो मासूम चेहरा याद है मुझे
वो खोखला प्यार याद है मुझे।
अभिनव

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Abhinav Kumar Yadav
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