अहसास

अहसास सुखद अनुभूति के भीतर है
अहसास दु:ख में उपजे निरन्तर है
विश्वाश की हर डोर से बंधा अहसास
जीवन का एक हिस्सा है खास

कभी अक्ष से बनकर नीर बहा
कभी हृदय को भी चीर सहा
असीम वेदना से भरे काले बादल है
तो कभी अन्तर्मन भरी ज्वाला

कुछ परिचित सा लगे
कभी कर भयभीत ठगे
सैलाब अहसासों का उमडे उर भीतर
राही जैसे बढ चलें निरन्तर

अहसास गहरा सागर है
निखरे जीवन तो उजागर है
दिव्य ज्योति को अपनाता है
अहसास हमें सन्मार्ग दिखाता है

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