अहमक़ लोगों के साये में

अहमक़ लोगों के साये में
क्या जीवन सुख को पायेंगे?
सङ्ग बुराई का होगा तो
कहाँ प्रसन्नता छायेगी?
दुर्दिन और बेकारी आएंगी
दिन दिन आएगी बर्बादी।

नहीं मानता मन करता है मनमानी।
मन की चाल निराली,
खींच रज्जु रखें मन की,
नहीं करें नादानी।
कुछ भी बोलें कुछ भी करलें,
मात्र यही क्या है आज़ादी?

समय समय की बात है बन्दे
कब राजा कब जोगी
कहने से पहले तुम सोचो
बात जो कहने वाली
कमी नहीं है किसी जगह पर
कहते खुद को जो शहजादी।

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