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“अहंकार” दोहे

Dr.rajni Agrawal

Dr.rajni Agrawal

दोहे

July 22, 2017

“अहंकार” दोहे
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अहंकार को त्याग दो, सर्प भाँति विषधार।
अवसर पा डँस लेत है,नहीं बचा उपचार।

अहंकार है शूल सम, देता घात हज़ार।
मधुर वचन औषध सदा, हरें पीर संसार।।

दंभ कबहुँ नहिं कीजिए, दंभ पतन आधार।
दंभ चढ़ा सिर रावणा, प्रभू कीन्ह संहार।।

काची माटी तन गढ़ा,काहे करे गुमान।
अंत काल पछतायगा,नहीं रहेंगे प्राण।।

मैं मैं रे मन क्या रटे,छोड़ छाँड़ि सब काम।
मन के भीतर लौ जला, मिल जाएँगे राम।।

पूत जनम पर रे मना,काहे करे गुमान।
धन दौलत को पायके,भूल जायगा मान।।

डॉ. रजनी अग्रवाल “वाग्देवी रत्ना”
महमूरगंज, वाराणसी (मो.-९८३९६६४०१७)

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Author
Dr.rajni Agrawal
 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न"... Read more
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