कविता · Reading time: 1 minute

असंभव को संभव बना दूंगा

समुद्र को भी संगम बना दूंगा ।
अगर चाहा तो असंभव को भी संभव बना दूंगा ।
ये पत्थर को पिलाकर पानी बना दूंगा ।
तारो को तोड़कर घर मे सजा दूंगा ।
किताबो के पन्ने को मुद्रा बना दूंगा ।
गैण्डे को अपना शिकार बना लूंगा ।
अगर चाहा तो असंभव को भी संभव बना दूंगा ।
हैरत मे पङ जाओगे आप कोयले को कोहिनूर बना दूंगा ।
चलते हुए राही की मंजिल बता दूंगा ।
किसी की भी कमजोरी बता दूंगा ।
अगर चाहा तो असंभव को संभव बना दूंगा ।
हवा महल को इन्द्र का आलय बना दूंगा ।
अमृत को विष का प्याला बना दूंगा ।
शेर को हौसले से गीदङ बना दूंगा ।
हारते हुए पासे को जीत का सांचा बना दूंगा ।
अगर चाहा तो असंभव को संभव बना दूंगा ।
हर पल को अपने गुलाम बना लूंगा ।
बंदूक को अपनी निगाहो से चला दूंगा ।
पानी को दहकता हुआ शोला बना दूंगा ।
आग को बर्फ का गोला बना दूंगा ।
साधारण सी लड़की को लैला बना दूंगा ।
अगर चाहा तो असंभव को संभव बना दूंगा ।

RJ Anand Peajapati

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