" असंतुष्टि की गाथा "

ये क्या हैं ?
मुझे कुछ समझ नहीं आता ।
हर दूसरे दिन के साथ ,
ये असंतुष्टि एक गाथा बन जाता ।

जब ना देखा तो ,
देखने की तड़प जग जाता ।
जब बात ना हो तो ,
बात बढ़ाने की कई तरकीब याद आता ।

जब ना मिले तो ,
मिलने की लालसा बढ़ जाता ।
मिनटों की बात ,
घंटों में बदल जाता ।

हर बात हर लम्हा ,
उनके और पास कर जाता ।
ना चाहते हुए भी ,
उनकी हर गलती पर प्यार उमड़ आता ।

धीरे – धीरे सब ,
साधारण बन जाता ।
अब उनमें हमे ,
कुछ भी ना भाता ।

अब फिर दिल ,
कुछ नया ढुंढने में लग जाता ।
थोड़ी सी कोशिश करते तो ,
बहुत कुछ बेहतर मिल जाता ।

ये असंतुष्टि की आग ,
फिर उनकी याद दिलाता ।
कभी हम मुस्कराते तो ,
कभी बहुत रोना आता ।

ना चाहकर भी ,
सब कुछ खत्म सा हो जाता ।
यही तो है असंतुष्टि की गाथा ,
दिल पर सिर्फ उनकी यादों का पहरा रह जाता ।

🙏 धन्यवाद 🙏

✍️ ज्योति ✍️
नई दिल्ली

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