मुक्तक · Reading time: 1 minute

अश्रु-नाद

खो गयी प्रेम की नगरी
झंझा-झंकोर घन घेरे ।
हो हाहाकार हृदय में
सुन अश्रु-नाद को मेरे ।।

लघु बूँदे ले मतवाला
नभ से ऐ ! नीरद माला ।
बुझने दे आँसू-नद से
अभिलाषाओं की ज्वाला ।।

मम् व्यथित हृदय से आती
अंतर्मन में अकुलाती ।
जीवन की नित अभिलाषा
आँसू बनकर बह जाती।।

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