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अश्रुनाद स्व- भावानुवादित

Dr. umesh chandra srivastava

Dr. umesh chandra srivastava

मुक्तक

July 31, 2017

. …. मुक्तक ….

अविरल कलियों का आना
आकर उनका मुरझाना
नव रंग मंच में रञ्जित
जीवन अभिनय कर जाना

स्व- भावानुवादित

Ever flowering uninterrupted .
Comes and become dejected .
Dramatic performed in life .
Frequentaly curiosity implemented .

डा. उमेश चन्द्र श्रीवास्तव
लखनऊ

Author
Dr. umesh chandra srivastava
Doctor (Physician) ; Hindi & English POET , live in Lucknow U.P.India
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