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अश्रुनाद स्व- भावानुवादित

Dr. umesh chandra srivastava

Dr. umesh chandra srivastava

मुक्तक

July 29, 2017

. …. मुक्तक …

सुस्मृति हिय में लहरायी
तब सघन वेदना छायी
आँसू बनकर नभ बदली
फिर आज दृगों में आयी

स्व- भावानुवादित

When sweet memory disperse in heart .
Dense pain comes over and hurts .
Tears become the clouds of sky .
In the eyes again revert .

डा. उमेश चन्द्र श्रीवास्तव
लखनऊ

Author
Dr. umesh chandra srivastava
Doctor (Physician) ; Hindi & English POET , live in Lucknow U.P.India
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