.
Skip to content

अश्रुनाद अँग्रेजी भावानुवाद

Dr. umesh chandra srivastava

Dr. umesh chandra srivastava

मुक्तक

July 9, 2017

. …. मुक्तक ….

नीलाम्बर में लहराऊँ
नभ यायावर कहलाऊँ
निज विपुल रूप धर पल में
मानव मन को बहलाऊँ

भावानुवाद ( स्वरचित )

Comes in the indigotic sky .
Called as nomad sphere high .
Takes own many form in moment .
Human mind rejoice occupy .

डा. उमेश चन्द्र श्रीवास्तव
लखनऊ

Author
Dr. umesh chandra srivastava
Doctor (Physician) ; Hindi & English POET , live in Lucknow U.P.India
Recommended Posts
अश्रुनाद
...मुक्तक ... मधुऋतु मधुरिम लहराये सरगम नव वाद्य बजाये फिर सप्त सुरों में कोयल जीवन संगीत सुनाये भावानुवाद ( स्वरचित ) Malodic season looking Sweet... Read more
अश्रुनाद
. .... मुक्तक .... सावन बदली जब आती तब विरह रागिनी गाती उर में दामिनि दृग बूँदे सुस्मृति निर्झर कर जाती अँग्रेज़ी भावानुवाद ( स्वरचित... Read more
अश्रुनाद
. .... मुक्तक .... नीलाम्बर में लहराऊँ सतरंगी पंख सजाऊँ जीवन के शून्य गगन में बनकर विहंग उड़ जाऊँ भावानुवाद ( स्वरचित ) Waverer in... Read more
अश्रुनाद
. .... मुक्तक .... प्रतिध्वनियाँ हिय गुञ्जातीं स्मृति चिन्हों से टकरातीं अभिलाषित सघन घटनाएं नयनों को आ बरसातीं भावानुवाद ( स्वरचित ) Echoing in my... Read more