.
Skip to content

*अश्क*

Dharmender Arora Musafir

Dharmender Arora Musafir

गज़ल/गीतिका

August 12, 2016

अश्क आँखों में दबाना सीख ले
दर्द में भी मुस्कुराना सीख ले

प्रीत के ही गीत तू गाये सदा
वैर को दिल से भुलाना सीख ले

अब कहाँ मिलती पुरानी सी वफ़ा
इस जफा से दिल लगाना सीख ले

राह उजली या अँधेरी जो मिलें
तू उन्ही पर पग बढ़ाना सीख ले

हो गयी है अब सुहानी ये धरा
जीत को मन में समाना सीख ले *धर्मेन्द्र अरोड़ा*

Author
Dharmender Arora Musafir
*काव्य-माँ शारदेय का वरदान *
Recommended Posts
*सीख*
ऐ सुमन मुरझा नहीँ तू मुस्कुराना सीख ले मन चमन घबरा नहीँ तू खिलखिलाना सीख ले प्रीत का पलड़ा रहा है हर घड़ी ही डोलता... Read more
*विधाता छंद*मापनी-1222 1222 1222 1222
ऐ सुमन मुरझा नहीँ तू मुस्कुराना सीख ले मन चमन घबरा नहीँ तू खिलखिलाना सीख ले प्रीत का पलड़ा रहा है हर घड़ी ही डोलता... Read more
सीख लिया है।
Neelam Sharma गीत Jun 3, 2017
ज़ख्मों पर पैमंद। सुनो, आजकल मैंने ज़ख्मों का मेकप करना सीख लिया है। तेरी भूली बिसरी यादों से मैंने ब्रेकअप करना सीख लिया है। आंखों... Read more
मेरे दर्द का हिसाब/मंदीप
मेरे दिल का हिसाब.......मंदीप मेरे दर्द का अब तू हिसाब लगा ले, तड़पा हूँ बहुत अब तो गले से लगा ले। तेरी जुदाई में गिरे... Read more