कविता · Reading time: 1 minute

अवध में फिर से आये राम ।

अवध में फिर से आये राम ।

आज सब हर्षित हैं पुर ग्राम
अवध में फिर से आये राम ।

रहे त्रेता में वनवासी,
तो कलियुग में तम्बूवासी
कभी निश्चर संहारे राम
हरे अब विधि के विघ्न तमाम

आज सब हर्षित हैं पुर ग्राम
अवध में फिर से आये राम ।

घर घर होगी खुशहाली
गीत मंगल गाओ आली
मनेगी फिर से दीवाली
पधारे राम ह्रदय सुखधाम

आज सब हर्षित हैं पुर ग्राम
अवध में फिर से आये राम ।

राम हैं भक्तों के विश्वास,
राम हैं जनजीवन की आस
नाम से बनते बिगड़े काम
राम की लीला ललित ललाम ।

आज सब हर्षित हैं पुर ग्राम
अवध में फिर से आये राम ।

अनुराग दीक्षित ।

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