मन की थकन जो उतार दे वो अवकाश चाहिए

मन की थकन जो उतार दे
वो अवकाश चाहिए ।
इस भागती सी जिंदगी में
फुरसत की सांस चाहिए ।
चेहरों को नहीं दिल को भी
पढने का वक्त हो ….
मोबाइल लैपटॉप से
कुछ पल
संन्यास चाहिए ।
मन की जमीं के सूखे
पर तो
ध्यान ही नहीं।
कब बन गए उसर
हमें ये भान ही नहीं।
कोई फूल
इस पर
खिलने को
प्रयास चाहिए ।
अपनों की
देखभाल का
एहसास चाहिए ।
अब बहुत मन भर
गया
बड़प्पन
और मान से।
है बहुत तृप्त अहम
झूठी आन बान शान से।
इसको भी एक दिन का
उपवास चाहिए ।
बन जाऊं
तितली या परिंदा कोई
वो आभास चाहिए ।
मन की थकन
जो उतार दे
वो अवकाश चाहिए ।

अवकाश
पर
मेरी कलम से …..

योगिता तिवारी

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