कविता · Reading time: 1 minute

अलविदा!

मुझे प्यार ना होता तो इस कदर भला मैं क्यूँ रोता।
छुपा कर सारे दुख , दर्द , जज्बातों को..आहें क्यूँ भरता।
प्यार की तड़प में हर दर्द की दवा तू…नादाँ नहीं समझती।
बाहों में मिटने की ख्वाहिश रख ,भला मै कैसे जी सकता।

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