कविता · Reading time: 1 minute

अलंकृत कर देखिये

मन के तारों को एक बार झंकृत कर देखिये
तार को अपने तार से अलंकृत कर देखिये

मुहब्बत के परफ्यूम के डूबे हुए दिखते हो
आपस में टकरा टंकार करते हुए दिखते हो
प्रणय उदधि में हाव भाव का राग मिला लो
भावों विचारों से अपने सुसंकृत कर देखिए

तार को अपने तार से अलंकृत कर देखिये

आशे ,अभिलाशे मेरी और तेरी जब एक है
इशारे और संकेत मेरे और तेरे जब एक है
हम दोनों पर्थिक अनुचर एक ही राह के बने
भूल कर सब हमकों आप स्वीकृत देखिये

तार को अपने तार से अलंकृत कर देखिये

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