कविता · Reading time: 1 minute

अर्सा बीत गया

अर्सा बीत गया
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भले ही कितना अर्सा
बीत जाये पर,
मैं हार नहीं मानूँगा।
थकूंगा नहीं
तब तक नहीं रुकूंगा
जब तक जीत नहीं जाऊँगा।
माना कि अर्सा बीत गया
तो क्या हुआ?
अभी मैं जीता तो नहीं
मगर हार भी माना नहीं
मुझे जीतना ही है
हार को हराकर
हरहाल में।
@सुधीर श्रीवास्तव

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