Skip to content

“अरूणाभा-एक बेटी के प्रति पिता का हृदय”

आनन्द कुमार

आनन्द कुमार

कविता

January 20, 2017

वह सुन्दर सी, कोमल
हाथों में जब मेरे आयी,
पुलकित हुआ हृदय मेरा
जब देखा
चेहरे पर लालिमा छायी ।

प्यारा सा सुस्मित चेहरा
लग रहा हो जैसे चन्द्रानन
उत्ताल हुईं हृदय की लहरें
जब देखे
उसके कोमल नयन ।

बज रहीं बधाइयाँ ढेरों
घर-उपवन मे खुशहाली छायी
बाबुल सबको कहते-फिरते
मेरे आँगन रानी बिटिया आयी ।

प्रफुल्लित हो उठा हृदय मेरा
जब उसके मुख से निकला पहला शब्द
लगा जैसे कि
पुष्पों ने पंखुड़ि-पट खोले
कर गया वो सबको नि:शब्द ।

तब विचार मन-मस्तिष्क मे कौंध गया
क्यों बेटी का जन्म नहीं भाता
इस दिव्य-रत्न अवतारण का
क्यों जग मे सम्मान नहीं होता ?

क्या जग को मिथ्या समझूँ !
या समझूँ उस सच्चाई को
दिया अनुपम वरदान विधाता ने
क्यों न स्नेह करूँ “अरूणाभा” को ?

कम नहीं हैं बेटियाँ किसी से
चाहों तो इतिहास के पन्नों को
पलट देखो
गार्गी, अपाला और रानी लक्ष्मीबाई
जग में जिसने अपनी पहचान बनाई ।

आधुनिकता की बात करें तो
बेटियों ने परचम लहराया
डॉक्टर, इंजीनियर और रेसलर बनकर
देश का सम्मान बढ़ाया ।

इसलिए निवेदन है सबसे
इस कुसुम-कलिका को विकसने तो दो
इसकी सुगंधित “अरूण-कान्ति” को
सर्वत्र बिखरने तो दो ।।

(अरूणाभा-लाल कान्ति वाली)
-आनन्द कुमार

Author
आनन्द कुमार
आनन्द कुमार पुत्र श्री खुशीराम जन्म-तिथि- 1 जनवरी सन् 1992 ग्राम- अयाँरी (हरदोई) उत्तर प्रदेश शिक्षा- परास्नातक (प्राणि विज्ञान) वर्तमान में विषय-"जीव विज्ञान" के अन्तर्गत अध्यापन कार्य कर रहा हूँ । मुख्यत: कविता, कहानी, लेख इत्यादि विधाओं पर लिखता हूँ... Read more
Recommended Posts
कविता
भौरे की गुंजन, कोयल की कू-कू, चारु-चन्द्र चन्द्रिका, प्रीत बरसे, प्रेम विरह की अग्नि में,हृदय मेरा जलता रहे, सुर नर मुनि,सब धैर्य को त्यागे, विरह... Read more
तेरे आने से
तुम जबसे मेरे जीवन मे आयी हो जीवन मेरा एक अनजाने से रस से भर गया है तुम जो आयी हो तो एक कमी सी... Read more
हिंदी
"हिंदी" विश्व में अद्वितीय है हिंदी अभिव्यक्त का सागर है हिंदी सबकुछ परिभाषित है इसमें हर रिश्ते की मिठास है हिंदी मेरे हृदय में बसी... Read more
परछाई
परछाईं ******* परछाई बन मेरे हमसफर संग साथ ही में रहा करो। कभी जो भटकूँ राह कही मुझे राह पे तुम किया करो। परछाई बन... Read more