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" -------------------------------------- अरमानों का खेला " !!

थोड़ा सा विश्राम दूं तन को , मन भी लगे थकेला !
काटे से कटते ना दिन है , समय बड़ा अलबेला !!

सज़ धज कर श्रृंगार किया है , बाट जोहती आंखें !
अंतर्मन की चाहत को है , तुमने पल पल ठेला !!

संदेशों से पा जाते हैं , ऊर्जा नई नई सी !
तुम आये तो सज़ जाता है , अरमानों का खेला !!

ताने खूब सुना करते हैं , आँचल कोरा कोरा !
लक्ष्य तुम्हारा लिये सामने , कठिन लगे है बेला !!

सेवा भाव बन्धा है पल्लू , मोल कोइ ना जाने !
कमजोरों को खाने पढ़ते , यहां सदा ही ढेला !!

शिक्षा दीक्षा गांठ बन्धी है , यही काम बस आवे !
चतुर जनों के पास भीड़ है , हम तो रहे अकेला !!

अल्हड़ता खोयी खोयी है , गुमसुम है खुशहाली !
यहां प्रतीक्षित अभी लगे है , परिवर्तन का रेला !!

मुस्कानों के तीर जगाकर , अपनी पीर भुला दूं !
तुम आये तो लग जायेगा , उम्मीदों का मेला !!

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भगवती प्रसाद व्यास
भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "
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