अमिट याद।

(१)
तेरी आंखों के काजल सी रात,
काली अंधियारी मगर खूबसूरत।
(२)
तेरे होने का एहसास कराती ये हवा,
मंद-मंद बहती जो गुज़रती है पास से।
(३)
तेरी अमिट याद के जैसी सांझ,
जो आती है रोज़ ढल जाती है।
(४)
गिरती उठती तेरी पलकों सा चांद,
कभी दिखता कभी छुपता “अंबर” की बदली में।
(५)
महसूस होती तेरी आवाज़ के जैसी,
सावन की रिमझिम बारिश संगीत सी लगती।
(६)
कभी ठहरती कभी गुज़र जाती ये घटाएं,
घनी-घनी तेरी बिखरी ज़ुल्फों सी।

-अंबर श्रीवास्तव।

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