अमर रहेगा रावण

जल गया रावण फिर से हर साल की तरह,
पर इंसा में अभी तक जिन्दा एक काल की तरह I
मन के भीतर बैठा है एक ख्याल की तरह,
लिपटा हुआ है तन में जैसे एक जाल की तरह I
करले कोशिश तू क्या इसे निकाल पाएगा ?
हर बार पूछा जाएगा एक सवाल की तरह I
तीर से मारों इसे या किसी भाल की तरह,
न जलेगा न कटेगा कोई जंजाल की तरह I
सीख न ले जब तक तू संस्कार राम की तरह,
अमर रहेगा रावण तेरे भीतर हर साल की तरह I
अमित कुमार प्रसाद, आसनसोल (प. बंगाल)

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 3

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share