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अभी बाकी है ...

गुजर गई है रात पर खुमार अभी बाकी है
मिट गए निशान-ए-ज़ख्म, दर्द यार अभी बाकी है

मत सोच लेना अब जंग में खामोश बैठूंगा
कुछ कर गुजरने का दिल में गुबार अभी बाकी है

हो रहे हो पस्त देख बाजुओं की ताकत
कैसे करोगे सामना, हथियार अभी बाकी है

हैरत में पड़े हैं सब , महफ़िल-ए-रंग देखकर
सजायेगा जो महफ़िल वो फनकार अभी बाकी है

मदमस्त मत हो जाना जीत के नशे में
खत्म हुआ है दुश्मन, गद्दार अभी बाकी है

जरूरी तो नहीं वो मेरा हमसफर हो जाएगा
अभी तो हुआ है प्यार , इज़हार अभी बाकी है

आये थे डूबने तो क्यूँ रुक गए साहिल पर
दरिया-ए-मोहब्बत की मझधार अभी बाकी है …

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. … हरवंश श्रीवास्तव

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हरवंश श्रीवास्तव
हरवंश श्रीवास्तव
बाँदा , उ0प्र0
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लेखक/कवि शिक्षक नेता , अध्यक्ष UPPSS तिन्दवारी
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