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** अभी बाकी है **

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

मुक्तक

October 9, 2017

अभी बाकी है कुछ लम्हे मुझे ओर जीने दे

क्या फ़र्क पड़ता है मुझे कुछ ओर पीने दे

दरख्त भी सूखते हैं वक्त आने पर ऐ ‘मधुप’

जीना बहुत हुआ मरमर जीने के लिए पीने दे ।।
?मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more

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