कविता · Reading time: 1 minute

अभी तो बस! चलने का इरादा किया है…!!

अभी तो बस! चलने का इरादा किया है,
जीत के घर लौटूंगा… ये माँ-बाबा से वादा किया है..!

सपने बड़े ही सही… इश्क़ मैंने भी खुद से ज्यादा किया है,
आज जूनून से भी मैंने.. किस्मत का तकाजा किया है..!
अभी तो बस! चलने का इरादा किया है…!!

लाज़मी है.. रास्ते में मुश्किलें मिलेगी हज़ारों,
फिर जीत मिले या हार… मैंने भी अगले दो कदम का अंदाजा लिया है..!!
अभी तो बस! चलने का इरादा किया है…!!

रूबरू होना है दुनिया की तमाम चलाकियों से,
जो मतलब का रिश्ता रखते है मुझसे,
आज उनसे भी मैंने किनारा लिया है…!!
अभी तो बस! चलने का इरादा किया है…!!

जानना जरुरी है जिंदगी की कस्मकस को,
वो टूट जाता है जहां में, जिसने भरोसा किसी पे जरा-सा किया है..!
अभी तो बस! चलने का इरादा किया है…!!

मौत आएगी एक दिन… ये सबको पता है,
कब किसकी आयेगी… ये किसको पता है..!
रुकना नहीं..बढ़ते रहो मंज़िलो की ओर…
जीत के दिखाओ..फिर बताओ…
तुमसे किसको.. कितना…शिकवा-गिला है…!!
अभी तो बस! चलने का इरादा किया है…!!
❤Love Ravi❤

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