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अभिशाप कहे

Rita Yadav

Rita Yadav

कविता

June 26, 2017

अभिशाप कहे संताप कहे
या इसको कोई पाप कहे

जहां दो वक्त की रोटी नहीं
इस को भला क्या आप कहें?

मुफलिसी के दायरे को
ए कैसा लगा इक शाप कहें

अभिशाप कहे संताप कहें
या इसको कोई पाप कहे

सर्द हवा के थपेड़ों में
खुले नीचे पेड़ों में

जीवन यापन को मजबूर
इनका क्या प्रलाप कहें.?

अभिशाप कहे संताप कहें
या इसको कोई पाप कहे

नौनिहालों को दूध खिलौना नहीं
सोने को खाट बिछौना नहीं

बचपन छिन जाता इनसे इनका
भविष्य भी नहीं दिखता जिनका
किसका इसे प्रताप कहें

अभिशाप कहे संताप कहें
या इसको कोई पाप कहे

रीता यादव

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Author
Rita Yadav
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