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अभिलाषा नादान की

पं.संजीव शुक्ल

पं.संजीव शुक्ल "सचिन"

कविता

December 7, 2017

सुन्दर स्वच्छ हो देश हमारा
हमको यह प्राणो से प्यारा
जग में हम भी नाम करें
यह बात राष्ट्र सम्मान की
अभिलाष नादान की।

स्वक्षता का बनेंगे सूचक
शिक्षा का हम बनेंगे द्वेतक
कोई नहीं अड़चन आजाये
बात राष्ट्र स्वाभीमान की
अभिलाषा नादान की।

जाती – पाती का भेद नहीँ हो
हम सब का उद्देश्य यही हो
मेधा को सम्मान दिलाना
बात क्षमता उत्थान की
अभिलाषा नादान की।

जन – जन का अब एक ही नारा
आरक्षण मुक्त हो राष्ट्र हमारा
मेधा को अधिकार दिलाना
बात मेधावी उत्थान की
अभिलाषा नादान की।

शिष्टाचार का भान करेँ हम
सभ्यता का सम्मान करेँ हम
सभ्यता का अनुपालन करना
बात राष्ट्र के शान की
अभिलाषा नादान की!!
*********
©®पं.संजीव शुक्ल “सचिन”

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Author
पं.संजीव शुक्ल
From: नरकटियागंज (प.चम्पारण)
D/O/B- 07/01/1976 मैं पश्चिमी चम्पारण से हूँ, ग्राम+पो.-मुसहरवा (बिहार) वर्तमान समय में दिल्ली में एक प्राईवेट सेक्टर में कार्यरत हूँ। लेखन कला मेरा जूनून है।
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