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” अब शरारत – होने को है ” !!

भगवती प्रसाद व्यास

भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

गीत

January 23, 2017

मौन तुम हो ,
मौन हम हैं !
जितना पा लें ,
उतना कम है !
दुनिया सिमटी ,
है बांहों में !
अभी बहुत कुछ –
खोने को है !!

द्वार मन के ,
बंद हैं अब !
धड़कनों में ,
द्वन्द है अब !
रोम रोम हो ,
कहते पुलकित !
दिल , दिल में –
समोने को है !!

न है शिकवे ,
न शिकायत !
अब तो बरपी ,
है ईनायत !
गुनगुनाते अधर ,
स्वर मद्धम !
मिल जुल कर –
डुबोने को हैं !!

Author
भगवती प्रसाद व्यास
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में... Read more
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