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अब मैं क्या कहूं

कुछ दिन पहले की बात है। जो घटना हमारे साथ घटी थी। वह मैं आप के साथ शेयर करने जा रहा हूँ।
जब मैं कम्प्यूटर पढ़ने जाता था। उस वक्त उस बैच में मात्र चौबीस विद्यार्थी थे, जिसमें बीस छात्रा एवं चार छात्र थे, जिसमें से एक मैं भी था।

एक दिन की बात है कि जिस कम्प्यूटर क्लास में मैं पढ़ता था, उसमें 15 अगस्त के शुभ अवसर पर कार्यक्रम होना था। जिसमें देश भक्ति नाटक, हास्य नाटक के साथ-साथ गीत गाने का भी आयोजन था।

इस कार्यक्रम में बहुत सारे छात्र एवं छात्रा भाग लिए हुए थे। जिसमें से मैं भी पाँच नाटक और दो गीत में भाग लिए हुए थे। पहला नाटक “चूहा का मडर” था जिसमें मैं पुलिसवाला था। दूसरा नाटक “भारत-पाक सम्मेलन” था जिसमें मैं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अंगरक्षक के रुप में था। तीसरे नाटक “सीता का स्वयंवर” था जिसमें मैं लक्ष्मण जी बना था। चौथे नाटक “औरत किसी की माँ तो किसी की बहन होती है” था इसमें मेरा नेगेटिव रोल था और पाँचवा नाटक था “बिहार की शिक्षा-दीक्षा” जिसमें मैं दूधवाला का रोल अदा किया था। जिसके माध्यम से दर्शकों को हँसा-हँसा कर लोट-पोट कर दिया था।

ये सारे कार्यक्रम 15 अगस्त को हुआ था। जिसको देखने के लिए मेरा छोटा भाई मेरे साथ आया था। उसी कम्प्यूटर शिक्षण संस्थान में हमारे क्लास की एक लड़की थी जो बहुत सुंदर थी। जिनका परिचय उसी कार्यक्रम के तहत मेरे छोटे भाई से हो गया। वह लड़की जो थी हमारी क्लासमेट थी। उस लड़की का दिल मेरे भाई पर उतर आया और मामले में मेरा भाई भी पिछे रहने वाला नहीं था। इस बात की जानकारी मुझे नहीं थी। 15 अगस्त का सारा कार्यक्रम समाप्त हुआ और हम सब अपने-अपने घर को गए। फिर दूसरे दिन से हमलोगों की पढाई शुरु हो गई और उधर मेरे छोटे भाई और उस लड़की के बीच प्रेम बढ़ता गया ।

एक दिन वह लड़की अपने पिता जी को मेरे भाई को देखने के लिए भेजी और मेरा भाई उस लड़की को तो पसंद था ही उसके पिता जी को भी पसंद आ गया। इस तरह शादी की बात हो गई और उस लड़की से मेरे भाई का शादी भी हो गई। मैं अभी तक इस बात को नहीं जानता था कि यह शादी मेरे कम्प्यूटर क्लास की लड़की से हुई है।

उस वक्त जब हमलोग पढ़ते थे। एक – दूसरे नाम लेकर दोस्त के तौर पर पुकारते थे तथा हँसी मजाक और बातें करते थे। लेकिन समस्या उस वक्त खड़ी हो गई, जिस वक्त मैंने उस लड़की को अपने घर दुल्हन के रुप में देखा। उस वक्त मैं सोच में पड़ गया की उसे “अब मैं क्या कहूँ”।

बात यह थी कि जो मेरा छोटा भाई था वह मेरे बड़े पापा का लड़का था।
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✍️जय लगन कुमार हैप्पी ⛳
बेतिया (बिहार)

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मैं जय लगन कुमार हैप्पी। मेरा वास्तविक नाम लगन है लेकिन घर के छोटे बच्चे यानी भतीजा - भतीजी हमें "बेतिया चाचा" कह कर पुकारते हैं। मैं एक गांव में…
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