.
Skip to content

अब मुझे यूँ आजमाना छोड़ दे

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

गज़ल/गीतिका

January 23, 2017

जिंदगी मुझको सताना छोड़ दे
अब मुझे यूँ आजमाना छोड़ दे

हो गए हैं सब यहां पर मतलबी
बेवजह रिश्ते बनाना छोड़ दे

योग्यता की है नहीं कोई कदर
फूल काँटों पे खिलाना छोड़ दे

देख ले भगवान गर इंसान में
आग दहशत की जलाना छोड़ दे

हो रही चर्चा सभी अखबार में
प्यार आँखों से जताना छोड़ दे

बेसमझ हैं लोग ना समझे जुबां
बेसबब बातें बढ़ाना छोड़ दे

डूब ना जाये कभी तू दर्प में
गुण ‘अदिति’ अपने गिनाना छोड़ दे

✍लोधी डॉ. आशा ‘अदिति’
भोपाल

Author
लोधी डॉ. आशा 'अदिति'
मध्यप्रदेश में सहायक संचालक...आई आई टी रुड़की से पी एच डी...अपने आसपास जो देखती हूँ, जो महसूस करती हूँ उसे कलम के द्वारा अभिव्यक्त करने की कोशिश करती हूँ...पूर्व में 'अदिति कैलाश' उपनाम से भी विचारों की अभिव्यक्ति....
Recommended Posts
दीप यादों के जलाना छोड़ दे
जख़्म दिल के तू दिखाना छोड़ दे फिर हंसेंगे सब बताना छोड़ दे ?? चैन फुर्क़त में न पाएगा कभी दिल हसीनों से लगाना छोड़... Read more
गजल
"नहीं आती है नींद मुझे रातो को तुम रोज ख्वाबो मे आना छोड दो, ना हंस पाता हु मै तेरी खामोशी से यूं खामोश रहके... Read more
दर्द को हर्फ हर्फ लिखना छोड़ दिया
दर्द को हर्फ हर्फ लिखना छोड़ दिया माथे की सिलवटे पढ़ना छोड़ दिया बंद हो गई है हिचकिया आना अब उन्होंने जो याद करना छोड़... Read more
फूँक  से  सूरज  बुझाना  छोड़  दो
फूँक से सूरज बुझाना छोड़ दो रेत की मुट्ठी बनाना छोड़ दो हो नहीं सकता जहाँ दिल से मिलना हाथ ऐसों से मिलाना छोड़ दो... Read more