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***** अब तो ****

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

मुक्तक

August 4, 2017

दिल टूट चुका है अब तो

सब लुट चुका है अब तो

कौन बचाये इस मंजर से

बस दम टूट जाये अब तो ।।
?मधुप बैरागी

है अख़्तियार-ए-मुहब्बत मुझको

है एतबार-ए-मुहब्बत अब मुझको

तुझको ना विश्वास जान मुझ पर

यूं अंजान बन-ना बेगाना मुझको ।।

?मधुप बैरागी

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Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल 13.7.2017 स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना... Read more

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