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“*”*अब तो दरस दिखा दो *”*”

Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

कविता

September 24, 2017

श्यामल घटा आच्छादित है नभ।
तडित भी दमकत है चहुंओर।।
बदरा संग बरसत मोरे नैना।
अब तो दरसन दो चितचोर।।
तोहरी याद सतावे जिया में।
झूम झूम नाचे मन मोर।।
बाट निहारत यूं दिन रैना।
जैसे चांद के लिए चकोर।।

——-रंजना माथुर दिनांक 13/07/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
©

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Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more
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