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अब तुझे दिल की बात बतानी जरूर है

Bhupendra Rawat

Bhupendra Rawat

गज़ल/गीतिका

September 4, 2017

अब तुझे दिल की बात बतानी जरूर है
आग जो लगी है कल्ब में दिखानी जरूर है

तिश्र्गी है आब की वो तो बुझ ही जायेगी
तेरी और अपनी कहानी बनानी जरूर है

हया नहीं है कुछ बाकी अब तो
तेरी हर अदा में जान लुटानी जरूर है

जख्म दिए है हज़ारों उपहार में तुमने
किश्ते हर जख्म की चुकानी जरूर है

महक उठती है फिजायें तेरे आने से
तेरे आने की ये निशानी जरूर है

तेरे आने से जहां गुलशन है सारा
तबस्सुम तेरी मेहरबानी जरूर है

जोखिम ही सही डगर में कितनी भी
जिंदगी तेरे संग बितानी जरूर है

हारा नही हूँ, चंद क्षण के लिए बैठा हूँ
तुझे भी अहमियत अपनी बतानी जरूर है

तू नही साथ तो, मैं तन्हा भी नहीं हूँ
यादों के साथ तन्हाई मिटानी जरूर है

जनाज़े में आये है सब गमगुस्सार
उस वक्त कीमत तूने जानी जरूर है

नम थी आँखे कल तक जो बुझ गयी
नम आँखों की कीमत तूने अब जानी जरूर है

आश्रू सुख गए है कब्र में अब
भूपेंद्र की याद में अश्रु आने जरूर है

भूपेंद्र रावत
4/09/2017

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Author
Bhupendra Rawat
From: उत्तराखंड अल्मोड़ा
M.a, B.ed शौकीन- लिखना, पढ़ना हर्फ़ों से खेलने की आदत हो गयी है पन्नो को जज़बातों की स्याही से रँगने की अब बगावत हो गईं है ।
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