कव्वाली · Reading time: 1 minute

अब तक मेरी निगाहों में आया नही कोई

अब तक मेरी निगाहों में आया नही कोई
 आका  हैं   जैसे आज भी वैसा   नही   कोई

मिसले नबी तो दुनिया में  कोई न है न होगा
यह शाने  लताफत  है  के  साया  नही कोई

ईमान मेरा   है  यही मेरा अकीदा है
सरकार के जलवों सा जलवा नही कोई

यारब कभी हो मुझको ज़ियारत मदिनें की
शहरे मदीना जैसा है वैसा नही कोई

ऐ  शाहे  दो जहाँ मुझे   चौखट पे बुलालो
तेरे सिवा “शोएब” का अपना  नही  कोई

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