कविता · Reading time: 1 minute

अब आ भी जाओ

आंखों से तुम सितम ढा रहे हो
बताओ दिल में कब आ रहे हो
तड़पा है बहुत ये दिल तेरे लिए
कहो कब अपना बना रहे हो।।

हम तो खो गए है अब
बस तेरे ही हो गए है
मिलोगे जब मुझे तुम
जानोगे क्या हो गए है।।

जब से देखा है मेरी निगाहों ने
तेरी खूबसूरती इसमें समा गई
मुझपर किया है एहसान तुमने
जो उजड़े चमन में बहार आ गई।।

ऐसे मिलने के लिए अब
इंतजार कर रहा हूं मैं तेरा
जैसे बारिश की बूंदों के लिए
प्यासा पपीहा हो कोई ।।

अब होश भी नहीं है मुझे
बारिश में भीगता रहता हूं
हर घड़ी हर पल मैं अब
तेरी तलाश में रहता हूं।।

बादल आते है पर बरसते नहीं
उनकी तरह धोखा तो ना दोगे
जब हो जाओगे तुम मेरे कभी
कहीं अकेला छोड़ तो ना दोगे।।

तेरे बिना सुनी है ये ज़िंदगी मेरी
कब आएगा जिंदगी में तू मेरी
बेहद ही हसीं वो समा होगा
जब आएगा ज़िंदगी में तू मेरी।।

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Author
कवि एवम विचारक
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