Jul 7, 2016 · कविता
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~~!!अबोध बालपन!!~~

~~!!अबोध बालपन!!~~
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“स्वयं के,
असुरक्षित भविष्य से,
अनजान!

गैर जिम्मेदाराना,
परवरिश से,
हैरान!

बचपन नादान,
है कैसा यह
विधि का विक्षिप्त विधान!!”____दुर्गेश वर्मा

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Durgesh Verma
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मैं काशी (उत्तर प्रदेश) का निवासी हूँ । काव्य/गद्य आदि विधाओं में लिखने का मात्र... View full profile
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